जब तुलसीदास जी को दर्शन देने प्रकट हुए रामभक्त हनुमान

 तुलसीदास-हनुमान मिलन कि कथा : कैसे हुए तुलसीदास जी को हनुमान के दर्शन

भगवान श्री राम के परम भक्त और श्रीरामचरितमानस के रचीयता महाकवि तुलसीदास जी को भगवान हनुमान के भगवान हनुमान के दर्शन कैसे हुए? भगवान श्री राम के दो परम भक्त हनुमान और तुलसीदास के कलयुग में मिलन कि कथा को आज हम आप सबको बताने वाले है। प्रेत की सहायता से कैसे गोस्वामी तुलसीदास ने बजरंगबली के दर्शन किए?
When Tulsidas meets lord Hanuman story


कौन है महाकवि तुलसीदास( who is the Tulsidas?) :

तुलसीदास जी ने गोस्वामी तुलसीदास के भी नाम से जाना जाता है उनका जन्म उत्तर प्रदेश के वर्तमान राजापुर में 1589 संवत को हुआ था। श्री तुलसीदास जी के जन्म के बारे में एक कथा प्रचलित है कि वे अपने माता के गर्भ में 9 महीने नहीं बल्कि 12 महीने थे जिसके कारण जन्म के समय ही इनके मुख में दांत दिखाई दे रहे थे। इनके पिता का नाम आत्माराम और माता का नाम हुलसी देवी था।

जन्म के कुछ समय बाद ही उन्होंने पहला शब्द मुख से राम बोला था जिसके बाद ही उनका नाम रामबोला पड़ गया।
कुछ ही वर्षों के पश्चात तुलसीदास जी का विवाह रत्नावली से हो गया।
विश्व भर में 100 सबसे अधिक प्रभावशाली ग्रंथों में शामिल श्रीरामचरितमानस कि रचना तुलसीदास जी ने ही की थी। श्रीरामचरितमानस को आज पूरे भारत में बहुत ही भक्ति भाव से पढ़ा जाता है विशेषकर उत्तर भारत में।

रामचरितमानस के अलावा तुलसीदास जी ने कवितावली दोहावली विनय पत्रिका हनुमान चालीसा समेत कई प्रसिद्ध रचनाएं की हैं।

तुलसीदास जी के संबंध में प्रचलित कथा:


ऐसा कहा जाता है कि तुलसीदास जी को अपनी पत्नी से बहुत अधिक प्रेम था उन्हें पत्नी के अलावा कुछ और नहीं सूझता था। एक बार जब उनकी पत्नी रत्नावली अपने मायके गई हुई थी तब तुलसीदास जी उनके प्रेम विरह में काफी तड़प रहे थे और उनसे मिलने रात्रि में पैदल ही अपने ससुराल पहुंचे जहां पर उन्होंने रत्नावली से मुलाकात की रत्नावली ने उनको समझाया कि जितना तुम मुझे प्रेम करते हो यदि इतना ही समय में भक्ति भाव से तुमने यदि श्री राम का नाम लिया होता तो अब तक तुम्हें भगवान के दर्शन हो गए होते।
 यह बातें तुलसीदास जी के मन में बस गई उनका हृदय परिवर्तित हो गया उन्होंने अपना सारा समय सिर्फ राम की भक्ति में लगाना शुरू कर दिया ।
वे अपनी पत्नी को छोड़ कर के चले गए उन्होंने अपने गुरु स्वामी नरहरिदास से दीक्षा ले और सारा समय भक्ति में लगा दिया और कई प्रसिद्ध ग्रंथो को लिखा।

तुलसीदास जी के हनुमान जी से मिलने की कथा:


हनुमान से मिलने के संबंध में एक कथा प्रचलित है जिसमें कहा जाता है कि तुलसीदास जी जब भगवान के दर्शन के लिए वन मन भटक रहे थे तब वह थक कर एक वृक्ष के नीचे बैठ गए और फिर साथ में लिए जल को (अपनी यात्रा में साथ लेकर चला करते थे) गुस्से में आकर उसी वृक्ष पर फेंक दिया।
 उस वृक्ष में एक प्रेत रहा करता था ऋषि के कमंडल के जल को ऊपर पड़ते ही वह मुक्त हो गया और बाहर आकर तुलसीदास जी के सामने खड़ा हो गया और बताया कि उसे मुक्ति उनके द्वारा फेके गए जल से हुई है। इसलिए जो भी आपकी समस्या है, सवाल है पूछ सकते है!
इस पर तुलसी दास जी ने पूछा कि उन्हें भगवान श्री राम के दर्शन कैसे होंगे?

 प्रेत ने बताया कि इस सवाल का उत्तर तो केवल बजरंगबली ही बता सकते है। बजरंग बली ही केवल आपको प्रभु राम से मिलवा सकते है। हनुमान जी का पता पूछने पर प्रेत ने बताया कि जब कहीं भी राम की कथा का वाचन होता है तो हनुमान जी वहा पर अवश्य ही पहुंच जाते है। प्रेत ने यह भी बताया कि कुछ दूर के एक मंदिर में राम कथा का आयोजन हो रहा है, वह भी हनुमान जी एक कोढी के वेश में पहुंचेंगे।
तुलसीदास जी तुरंत उस मंदिर पर पहुंच जाते हैं जहां पर राम कथा का आयोजन हो रहा है, जैसे ही हनुमान जी कोढी के बीच में वहां पर पहुंचे तुलसीदास ने तुरन्त उनके पैरों को पकड़ लिया और तब तक नहीं छोड़ा जब तक वे अपने असली रूप में नहीं आ गए।

इस तरह तुलसीदास को हनुमान जी के दर्शन इसके बाद हनुमान जी की सहायता से हीन तुलसीदास ने प्रभु राम की दर्शन किए, जिसे आप नीचे क्लिक करके पढ़ सकते है।


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