श्रीलंका में रावण की पूजा क्यों की जाती है?जानिए रावण से जुड़े इस रहस्य को

 श्रीलंका में रावण की पूजा क्यों की जाती है? विजय दशमी विशेष

भगवान श्री राम ने हजारों वर्षों पूर्व रावण का वध करके बुराई का अंत किया। इसलिए आज भी भगवान राम सनातन धर्मियों के आराध्य देव है और उनकी पूजा भारत समेत समूचे विश्व में कि जाती है। लेकिन श्रीलंका और भारत में भी कुछ स्थान ऐसे हैं जहां पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता है बल्कि उसकी पूजा की जाती है। आप सभी के मन मेरी यह सवाल अक्सर आता होगा कि रावण की पूजा करने का क्या अभिप्राय है? आखिर श्री लंका में रावण की पूजा क्यों की जाती है?
श्रीलंका में रावण की पूजा क्यों की जाती है? Mythology hindi


भारत के इन जगहों पर होती है रावण की पूजा:

श्रीलंका के अलावा भारत के अभी कुछ स्थानों पर रावण की पूजा की जाती है पुतला जलाने के बजाय जुलूस निकाले जाते हैं। अनेकों प्रकार के फूल मालाओं से सजीव रावण के रथ को क्षेत्र के चारों ओर घुमा कर उत्सव मनाया जाता है यह सभी कार्य विजयदशमी को भी किया जाता है।  रावण की पूजा कह होती है?

  • मंदसौर, मध्यप्रदेश ( mandsaur, M.P)
मध्य प्रदेश राज्य के मंदसौर शहर में महाजनी रावण का एक विशाल मंदिर है, जहा पर रावण की विशाल प्रतिमा भी स्थापित है। ऐसा माना जाता है कि यहां पर रावण का ससुराल यानी कि मंदोदरी का मायका था जिनके नाम पर यह शहर का नाम मंदसौर पड़ा। इसे पहले दशपुर कहा जाता था। इसके अलावा मध्यप्रदेश के विदिशा में भी अशोक सम्राट रावण का एक मंदिर है।

  • उत्तर प्रदेश (uttar pradesh)
उत्तर प्रदेश में विशेष कर दो जगह पर रावण की पूजा की जाती है जिसमें से एक शहर कानपुर और दूसरा प्रयागराज कानपुर के शिवाला इलाके में रावण का एक अत्यंत भव्य और विशाल मंदिर बना हुआ है जहां पर श्रद्धालु शक्ति और साहस के रूप में रावण की पूजा करते है। वही उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में भी रावण कि पूजा की जाती है ऐसा माना जाता है कि रावण का ननिहाल प्रयागराज में था इसलिए प्रयागराज के कटरा इलाके में भी रावण कि भव्य बारात निकाली जाती है।
रामायण के अनुसार, ऋषि भारद्वाज ने अपनी बेटी इलाविदा का विवाह विश्रवा के साथ किया था और इलाविदा ने धन के स्वामी और लंका के मूल शासक रहे कुबेर को जन्म दिया था. बाद में विश्रवा ने सुमाली की बेटी कैकेसी से भी विवाह किया, जिनसे उनके चार बच्चे हुए. इनमें सबसे बड़ा रावण था, जिसने अपने सौतेले भाई कुबेर को राज्य से खदेड़कर सिंहासन पर कब्जा जमा लिया था.

  • बैजनाथ हिमाचल प्रदेश
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ कस्बा शिव नगरी के नाम से मशहूर है। यहां पर भगवान शिव का एक भव्य मंदिर बना हुआ भव्य मंदिर बना हुआ है। ऐसा माना जाता है कि इसी मंदिर के शिवलिंग के पास बैठकर रावण ने कई वर्षों तक तपस्या की थी जिससे उसे भगवान शिव से मोक्ष प्राप्ति का वरदान मिला यहां के स्थानीय लोग रावण जैसे महा ज्ञानी का पुतला जलाना महापाप मानते है।

इसके अलावा भी भारत में कई और स्थान है जहां पर रावण की पूजा की जाती है।

आखिर श्री लंका में रावण की पूजा क्यों जाती है?

अभी तक आप को पता चल गया होगा की लंका है नहीं अभी तो भारत के बीच कुछ स्थानों में रावण की पूजा की जाती है आपके मन में सवाल उठ रहा होगा कि आखिर क्यों?

रावण महाज्ञानी, महापडित, अत्यंत बलशाली होने के साथ-साथ कई गुणों का मालिक है उसके पास बहुत सारी मायावी शक्तियां पुराण शिव का महान उपासक था। उसमे केवल एक अवगुण था कि वह अहंकारी था, अहंकार के चलते उसने अपने कुल का नाश किया और भाई कुबेर से भी बैर कर लिया।

श्री लंका में रावण को भगवान के रूप में नहीं बल्कि ऊपर दिए उसको गुणों के कारण पूजते है। 
रावण के वध के पश्चात भगवान राम द्वारा लक्ष्मण को उससे ज्ञान प्राप्त करने भेजना भी इसी ओर इशारा करता है कि यदि रावण के एक अवगुण को हटा दिया जाए तो उससे सभी गुण पूज्यनीय है। 

रावण को जलाना मतलब किसी व्यक्ति विशेष के पुतले को जलाना नहीं होता है बल्कि बुराई के प्रतीक को जलाना होता है। वैसे भी श्री लंका के लोग रावण को अपना पूर्वज मानते है। जिससे और वहा की मंदिरों में राम के साथ साथ एक रावण कि भी प्रतिमा लगी होती है। इस धर्म में आस्था रखने वाले लोग भगवान राम के साथ रावण को भी अपना आराध्य मानते है।

उम्मीद है कि आपको आपके सवाल श्रीलंका में रावण की पूजा क्यों की जाती है? और भारत में रावण की पूजा कहा कहा होती है? का उत्तर मिल गया होगा। 

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