व्रत, उपवास और उपासना में क्या अंतर है? Difference between vrat and upvaas in hindi

 व्रत, उपवास और उपासना में क्या अंतर है? Difference between vrat and upvaas in hindi :

व्रत उपवास और उपासना में क्या अंतर है इसको समझने के लिए आपको पहले इनके शाब्दिक अर्थ को समझना चाहिए।
वैसे आमतौर पर लोग व्रत और उपवास को एक दूसरे का समानार्थी समझते हैं लेकिन इसमें एक बहुत ही छोटा पर महत्वपूर्ण अंतर है जिसे हम आज समझेंगे। दोनों को ही अन्न जल त्याग कर भूखे रहने को माना जाता है लेकिन हमारे धर्म के बुद्धजीवियों ने व्रत और उपवास के अंतर को बखूबी समझाया है। After reading this post you will get the exact anwer of difference between vrat and upvaas.
Difference between vrat upvaas and upasana on hindi


व्रत और उपवास में क्या अंतर है?

व्रत का अर्थ होता है दृढ़ निश्चय अथवा प्रतिज्ञा करना जबकि उपवास का अर्थ होता है अन्न का त्याग करना ।
व्रत मन की शुद्धता का साधन है जबकि उपवास मनुष्य के शारीरिक शुद्धता का साधन है. धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो यह दोनों ही मनुष्य के लिए एक समान उपयोगी हैं।

व्रत क्या है? (What is vrat) :-

जैसा कि हमने व्रत का अर्थ ऊपर बताया कि दृढ़ निश्चय और प्रतिज्ञा करना होता है यह दृढ़ निश्चय कुछ भी हो सकता है जैसे की एक दिन खाना ना खाना, गरीबों की मदद करना, मौन रहना या फिर जैसे देवव्रत ने
किया आजीवन विवाह ना करने का व्रत।
संयम अथवा नियम का समानार्थी शब्द है व्रत। संबंधित नियम के अनुसार आप व्रत में कुछ विशेष भोजन कर सकते है अपनी इच्छानुसार ।

व्रत कितने प्रकार के होते है? (Types for vrat ):-

शास्त्रों में व्रत के बहुत से प्रकार बताए गए है। इसके अनेक प्रकारों के भी बहुत से प्रकार है। हम यहां पर आपको व्रत के कुछ मुख्य प्रकारों का वर्णन करेंगे।

  • कायिक

इस व्रत ने किसी भी प्रकार की हिंसा का त्याग, धन का संग्रह ना करना , उचित और सादा भोजन लेना, ब्रह्मचर्य आदि आता है।

  • वाचिक

इस प्रकार के व्रत में मनुष्य अपने वाणी पे नियंत्रण करता है अथवा मौन रहता है। 

  • मानसिक

मानसिक व्रत में मनुष्य अपने मन पर नियंत्रण रखने की कोशिश करता है, सभी प्रकार के व्रत में इसे सबसे कठिन बताया गया है। धार्मिक किताबो का अध्ययन करना, वैराग्य का अभ्यास 

  • अयाचित

जो कुछ बिना मांगे मिल जाए उसी को बचाकर दिन अथवा रार में एक बार भोजन करना और अपने संकल्प का पालन करना अयाचित व्रत करलाता है।

उपवास क्या होता है? (What is upvaas) :-

उप का अर्थ होता है बगल में अथवा पास में और वास का अर्थ होता है निवास करना इस प्रकार उपवास का शाब्दिक अर्थ है परमात्मा के पास बैठकर उनका अनुसरण करना जाप करना।
जाहिर सी बात है आप परम्मत्मंका ध्यान तब लगा सकते है जब आप का मन किसी भी दिशा में ना भटके। 
जब उपवास का अर्थ ईश्वर का ध्यान लगाना है तो इन सब बातों के बीच में क्या खाना है कब खाना है कितना खाना है अत्यंत तुच्छ हो जाती है जिसका कोई सार नहीं बनता है।
इसे एक उदाहरण से समझिए अगर आप भगवान की उपासना में बैठे हैं और आपके पेट में चूहे को दे तो भी आपक ध्यान भगवान पर लग ही नहीं पाएगा और साथ ही अगर आप बहुत ज्यादा खाना खा लेंगे फिर भी आप भगवान पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे। 

इसका अर्थ यह हुआ उपासना में आप हल्का सुपाच्य भोजन कर सकते हैं जिससे आपको एनर्जी भी मिलते रहेगी और भगवान की उपासना में कोई दिक्कत भी नहीं आएगी।

उपवास के प्रकार (types of upvaas) :-


1.प्रात: उपवास, 2.अद्धोपवास, 3.एकाहारोपवास, 4.रसोपवास, 5.फलोपवास, 6.दुग्धोपवास, 7.तक्रोपवास, 8.पूर्णोपवास, 9.साप्ताहिक उपवास, 10.लघु उपवास, 11.कठोर उपवास, 12.टूटे उपवास, 13.दीर्घ उपवास।


उपासना क्या है (what is upasana):-

व्रत और उपवास का मुख्य उद्देश्य ही होता है उपासना करना। उपासना ईश्वर की हो सकती है, अंतर्मन की हो सकती है ।
पूजा अर्चना भक्ति उपासना का ही समानार्थी शब्द है अर्थात वह क्रियाकलाप जिसे करने से आपको ईश्वर से मिलने की अनुभूति हो आपका मन शांत हो उपासना कहलाता है। यह उपवास के काफी करीब का अर्थ है जिसका अर्थ लगभग समान ही है। उप+आसन = पास में बैठना । इसमें किसी गुरु का होना जरूरी होता है।

निष्कर्ष (conclusion):-

ऊपर दिए गए बातों को पढ़ने के बाद हमें समझ में आ जाता है कि दृढ़ निश्चय करना व्रत कहलाता है, किसी विशेष नियम का पालन करते हुए ईश्वर का ध्यान करना उपवास कहलाता है।

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