पांडवो की मृत्यु का कारण क्या था? महाभारत के बाद की कथा

 पांडवो की मृत्यु का कारण क्या था? महाभारत के बाद की कथा :

आज हम आपको बताएंगे कि महाभारत का अंत कैसे हुआ और पांडवों की मृत्यु का क्या कारण था युधिष्ठिर अकेले ही शशरीर स्वर्ग में कैसे पहुंचे? महाभारत के बाद की कथा क्या है आपके मन में भी यह सवाल उठता है तो पोस्ट को लास्ट पड़ेगा क्योंकि यहां पर हमने महाभारत से जुड़ इन सारे सवालों का जवाब दिया है।

महाभारत के बाद की कथा पांडवो का अंत


महाभारत के युद्ध के बाद क्या हुआ था : 

अक्सर लोगों को कहानियां वही तक सुनाई जाती हैं जब महाभारत का 98 दिन का युद्ध समाप्त हो गया और दुर्योधन की मृत्यु हो गई उसके बाद युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हो गया लेकिन हम आपको बता दें कि महाभारत का अंत यह नहीं था महाभारत का अंत युधिष्ठिर के शरीर के साथ स्वर्ग पहुंचने के बाद खत्म होता है।

दुर्योधन की मृत्यु के बाद युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ इसी दौरान अपने 100 पुत्र को खो चुकी मां गांधारी ने भगवान कृष्ण को दोषी ठहराते हुए उनके भी संपूर्ण कुल का नाश हो जाने का अभिशाप दिया जिसके कुछ वर्ष बाद एक बहेलिया के द्वारा भगवान श्री कृष्ण के पैर में तीर लगने से उनकी मृत्यु हो गई थी तब तक सारी द्वारिका नगरी वापस समुद्र में डूब चुकी थी।

कुछ वर्ष तक युधिष्ठिर के द्वारा अन्याय पूर्वक राज्य चलाया गया उसके बाद अर्जुन के पौत्र और अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को सारा राज्य - पाठ सौंपकर वे  पांचों भाई और द्रौपदी हिमालय की अर्थात स्वर्ग की ओर चल दिए। 
उनके साथ एक कुत्ता भी था।
Mahabharat ke bad ki katha kya hai



पांडव स्वर्ग कैसे गए :

यह सवाल बार पूछा जाता है कि पांडव स्वर्ग कैसे दें लेकिन आप बता दें कि पांचो पांडव सशरीर स्वर्ग पर नहीं पहुंच पाए थे। केवल धर्मराज युधिष्ठिर ने ही स्वर्ग के अंदर सर शरीर प्रवेश किया था।

जब भी सभी स्वर्ग की ओर पैदल चल रहे थे तब सबसे पहले रास्ते में द्रौपदी गिर पड़ी और उनकी मृत्यु हो गई 
भीम द्वारा पूछने पर युधिष्ठिर ने बताया कि द्रौपदी पांचों भाईयो में सबसे अधिक अर्जुन को प्रेम करती थी उनकी यही एक दृष्टता उन्हें यह दिन दिखाया।

कुछ दूर जाने के पश्चात नकुल और सहदेव भी गिर गए। इसका कारण युधिष्ठिर ने यह बताया कि नकुल को अपने सुंदरता पर घमंड़ था और सहदेव को अपने ज्ञान पर जिसके कारण वह दोनों हम भाईयो को छोड़कर हमसे पहले चले गए।

जब अर्जुन ने भी अपना दम तोड़ दिया तो इस पर भीम से युधिष्ठिर ने कहा कि अर्जुन को अपनी धनुर्विद्या पर अभिमान था जिसके कारण वह हम दोनों को छोड़कर पहले ही मर गए।

जब स्वर्ग तक पहुंचने में कुछ ही दूरी शेष थी तब भीम भी गिर गए और अपने मृत्यू का कारण पूछा तब युधिष्ठिर ने बताया कि उनका भोजन की और अधिक लोलुपता ही तुम्हारी मृत्यु का कारण बना जिसे कारण तुम अपने शरीर के साथ स्वर्ग तक नहीं पहुंच सके। अब युधिष्ठिर के साथ एक कुत्ता ही शेष बचा था।  
इन्द्र ने उनके लिए रथ भेजा की आप इस रथ में बैठकर स्वर्ग चले तब युधिष्ठिर ने कहा कि नहीं मै आपके रथ का इस्तेमाल अकेले नहीं कर सकता अगर आप मेरे साथ इस कुत्ते को भी लेकर चलोगे तो मै इसका उपयोग करूंगा अन्यथा नहीं। मै पैदल ही अपनी यात्रा तय कर लूंगा।
इसपर कुत्ते में भगवान यम का रूप लेलिया और कहा की आप धन्य है अपने जीवन के अंत समय तक आपने धर्म का साथ नहीं छोड़ा । आप ही साशरीर स्वर्ग में वास करने लायक है।





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