रुद्राक्ष क्या है? इसे पहनने के फायदे और नुकसान। पूरी जानकारी

 रुद्राक्ष क्या है? इसे पहनने के फायदे और नुकसान क्या है? पूरी जानकारी

रुद्राक्ष यह सिर्फ एक फल का बीज ही नहीं बल्कि इससे  करोड़ों लोगो की आस्था जुड़ी हुई है, खासकर हिन्दुओं की। आज हम बात करेंगे रुद्राक्ष क्या है?(what is Rudraksh?) यह कितने प्रकार का होता है?, रुद्राक्ष पहनने के फायदे और नुकसान क्या है, रुद्राक्ष सिद्घि मंत्र क्या है और इससे जुड़ी कथाओं कि भी बात करेंगे। रुद्राक्ष से जुड़ी हर जानकारी को हम आप से साझा करेंगे।
रुद्राक्ष क्या होता है? इसको कैसे धारण करे

रुद्राक्ष क्या है? 

भारत समेत विश्व के कई देशों में रुद्राक्ष के वृक्ष पाए जाते हैं जोकि 200 तक ऊंचे हो सकते हैं। यह इस वृक्ष के फल का बीज होता है जो कि आकार में मटर के दानों से लेकर एक अखरोट के बराबर हो सकता है।यह केवल एक फल का बीज नहीं है बल्कि हिंदू धर्म में इसकी महत्ता इससे कहीं अधिक है।

रुद्राक्ष में पड़े सीधी रेखाओं के माध्यम से हम बता सकते हैं कि यह किस प्रकार का रुद्राक्ष है जिसे एक मुखी, रुद्राक्ष द्विमुखी रुद्राक्ष, पंचमुखी रुद्राक्ष इत्यादि।

रुद्राक्ष की उत्पत्ति की धार्मिक कथा:

रुद्राक्ष उत्पति की कथा इस प्रकार है कि एक बार भगवान शिव ने 1000 वर्षों तक समाधि लगाई थी, लगातार इतने वर्षों तक अपने नेत्रों को बंद किए हुए शिव ने उसे खोली तो उनका मन  संसार के कल्याण की ओर गया और जैसे ही प्रभु ने पलकें झपकाई उनके आंखो से जल के बिंदु धरती पर गिरे जिससे रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पति हुई ।

इसी संबद्ध में एक और कथा प्रचलित है कि जब भगवान शिव दक्ष कि पुत्री और अपनी पत्नी माता सती का शव लेकर तीनों लोको में तांडव कर रहे थे तब उनके इसी रौद्र रूप के आंखो से गिरे आंसू के बूंद से ही रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। 
 इसी वृक्ष के फल के बीज को ही रुद्राक्ष कहा गया। रुद्राक्ष का अर्थ होता है भगवान शिव की आंखे। 

रुद्राक्ष कितने प्रकार का होता है और इसे पहनने से क्या लाभ होता है (types of Rudraksh):
Rudraksh kya hai? Isko dharan karne ke niyam

क्या आपजानते हैं कि रुद्राक्ष कितने प्रकार का होता है इसे धारण करने से क्या-क्या लाभ होते हैं ? और कौन सा रुद्राक्ष आपके लिए सबसे उपयोगी है जिसे धारण करते हैं आपकी मनोकामनाएं पूरी हो जाए।
 रुद्राक्ष के दोनों अक्ष छिद्रों से जितनी सीधी रेखाएं गुजरती है वह रुद्राक्ष उतने मुख का होता है। सामान्यतः 1 से 14 मुख तक के रुद्राक्ष पाए जाते है। हर प्रकार के रुद्राक्ष का विशेष महत्व होता है और उसे धारण करने के अलग अलग नियम।
हम यहां पर रुद्राक्ष के प्रकार के साथ साथ उनके फलदाई महत्व की भी बात करेंगे।
  • एकमुखी रुद्राक्ष
यह ध्यान करने के लिए सबसे उत्तम रुद्राक्ष है इसे धारण करने से सुख समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है।
  •  द्विमुखी रुद्राक्ष
2 मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से मन को शांति मिलती है और यदि आप विवाहित हैं तो आपकी सभी मनोकामना को पूरा करके दांपत्य जीवन को सुखी बनाने में सहायता करता है।
  • तीन मुखी रुद्राक्ष
इसे मन की शुद्धि और स्वास्थ्य में वृद्धि तथा जीवन में ऐश्वर्य के लिए धारण किया जाता है। यह रुद्राक्ष युवाओं के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।
  • चतुर्मुखी रुद्राक्ष
ये रुद्राक्ष धारण करने वाले कि बुद्धि की एकाग्रता, कार्यक्षमता और रचनात्मकता बढ़ती है।
  • पंचमुखी रुद्राक्ष
पंचमुखी रुद्राक्ष को धार्मिक कार्य और ध्यान के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।
Panchmukhi rudraksh

  • छः मुखी रुद्राक्ष
यह रुद्राक्ष ज्ञान, बुद्धि और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है। इसका धारण संतान सुख के लिए भी किया जाता है।
  • सात मुखी रुद्राक्ष
व्यापार में तरक्की और आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए इसको धारण करना सबसे उपयुक्त माना गया है।
  • अष्टमुखी रुद्राक्ष
नौकरी आदि में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए इसको धारण किया जाता है। इससे आर्थिक वृद्धि भी होती है।
  • नव मुखी रुद्राक्ष
आत्मशक्ति को बढ़ाने के लिए नौमुखी रूद्राक्ष को सर्वोत्तम  माना गया है, बल, साहस, और निडरता पाने के के लिए इसे पहना जाता है।
  • दश मुखी रूद्राक्ष
शांति और सौंदर्य को बढ़ाने के लिए इसको धारण किया जाता है। भगवान विष्णु को खूब करने के लिए भी इसको धारण किया जाता है।
  • ग्यारह मुखी रुद्राक्ष
यह ज्ञान, अध्यात्म और प्रतिष्ठा देने वाला होता है।
  • बारह मुखी रुद्राक्ष
बारहमुखी रुद्राक्ष को धारण करने से धन धान्य और समृद्धि लाता है, इसे कान में धारण करने से इसका अधिक लाभ होता है।
  • तेरह मुखी रुद्राक्ष
यह मनचाहा लाभ प्रदान करने वाला होता है, इसे सच्छे मन और श्रद्धा से धारण करने वाले की सारी इच्छाएं पूरी होती है। यह काफी दुर्लभ होता है।
  • चौदह मुखी रुद्राक्ष
मनुष्य के सभी पुराने पापो का नाश करता है, अंतरात्मा की सुद्घि के लिए इसका उपयोग किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इसे धारण करने से मनुष्य भगवान शिव के समान पवित्र हो जाता है।


रुद्राक्ष धारण करने के नियम :

भगवान शिव के आसुओं से बने इस रुद्राक्ष को धारण करने के नियम भी हैं यदि आप इन नियमों का पालन नहीं करते हैं तो यह आप को फलित करने के बजाय दोष देता है आपकी सभी कार्य उल्टे  होने लगते हैं अतः रुद्राक्ष को धारण करते समय भगवान को याद करने के साथ ही उनके नियमों का भी पालन करना आवश्यक होता है।
Rudraksh in white rope


  1. रुद्राक्ष को करनी काले रंग के धागे/वस्त्र में धारण नहीं करना चाहिए इसे धारण करने के लिए लाल रंग अथवा पीला रंग का धागा सर्वोत्तम होता है लेकिन यदि आपके पास यह उपलब्ध नहीं है तो आप सफेद रंग के धागे का उपयोग कर सकते हैं
  2. रुद्राक्ष को कभी अपवित्र होकर धारण नहीं करना चाहिए। 
  3. अपने रुद्राक्ष को किसी अन्य व्यक्ति को नहीं सौंपना चाहिए और ना ही किसी अन्य के रुद्राक्ष को धारण करना चाहिए।
  4. यदि आप रुद्राक्ष को माला के रूप में धारण करना चाहते हैं तो इसके लिए 27 अथवा अधिक रुद्राक्ष की माला को धारण करें।

रुद्राक्ष धारण करने के नुकासन (हानिया) :

वैसे रुद्राक्ष को यदि आप नियम पूर्वक धारण करते है और उसकी स्वच्छता का संपूर्ण ध्यान देते है तो यह आको कभी अहनी नहीं पहुंचाता है। लेकिन यदि आओ इसकी देखरेख में बार बार कोई गलती कर रहे है अथवा इसकी अवामनाना कर रहे है तो शिव का यह प्रसाद आपके लिए घातक हो सकता है। 
यह आपको लाभ के बजाए हानि पहुंचना शुरू कर देता है। इसको धारण करने से पहले इसके नियमों को जान के यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका गलत उपयोग आपको निर्धन भी बना सकता है। इसके सभी


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